पारिवारिक वातावरण क¢ संदर्भ में उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की शैक्षिक रूचि एवं मानसिक स्वास्थ्य का अध्ययन
डाॅ. निधी अग्रवाल1, डाॅ. अब्दुल सत्तार2, श्रीमती मनीषा जैन3
1सहायक प्राध्यापिका, कंिलंगा विष्वविद्यालय, नया रायपुर
2विभागाध्यक्ष, कमला नेहरू महाविद्यालय, कोरबा
3सहायक प्राध्यपिका, प्रगति महाविद्यालय, रायपुर
*Corresponding Author E-mail:
ABSTRACT:
बालक जन्म लेने के बाद से ही अनेक परिस्थितियों का सामना करता है और विकासोन्मुख होता हुआ आगे बढ़ता है, इस प्रक्रिया में वह बहुत से अनुभव ग्रहण करता है। इस अनुभव ग्रहण करने मंे ही उसकी शिक्षा निहित होती है। जान लाॅक ने मानवीय जीवन में शिक्षा के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा है कि- पौधों का विकास कृषि से होता है और मनुष्य का शिक्षा द्वारा’’।
KEYWORDS: विद्यार्थियों की शैक्षिक रूचि एवं मानसिक स्वास्थ्य
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बालक जन्म लेने के बाद से ही अनेक परिस्थितियों का सामना करता है और विकासोन्मुख होता हुआ आगे बढ़ता है, इस प्रक्रिया में वह बहुत से अनुभव ग्रहण करता है। इस अनुभव ग्रहण करने मंे ही उसकी शिक्षा निहित होती है। जान लाॅक ने मानवीय जीवन में शिक्षा के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा है कि - ‘‘पौधों का विकास कृषि से होता है और मनुष्य का शिक्षा द्वारा’’।
बालक की षिक्षा तथा उसका विकास जन्म होने के बाद से ही प्रारम्भ हो जाती है। अतः जन्म से ही प्रत्येक बालक को एक पारिवारिक परिवेष प्राप्त होता है, यही से उसकी षिक्षा की शुरूआत होती है, इसलिये परिवार को बालक की प्रथम पाठषाला कहा जाता है और पारिवारिक वातावरण को बालक के सर्वांगीण विकास की आधारषिला। बालक अपना व्यवहार, आचार-विचार, नैतिकता आदि अपने परिवार की मान्यताओं के अनुसार निर्मित एवं विकसित करता है। षिक्षा का उद्देष्य बालक का सर्वांगीण विकास करना हैं, परन्तु इसमंे पारिवारिक वातावरण की भूमिका मुख्य है।
शैक्षिक रूचि वह मानसिक अवस्था है जो व्यक्ति को किसी वस्तु या क्रिया की ओर ध्यान देने के लिये प्रेरित करती है। शैक्षिक रूचि के मूल में यह सिद्धांत कार्यरत रहता है कि कोई भी दो व्यक्ति कभी भी समान नहीं हो सकते है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी रूचि के अनुसार विषयों का चयन कर सकता है और उसमें अपनी शिक्षा जारी रख सकता है। इसलिये बालक की रूचि जिन विषयों में होगी उनमें उपलब्धि स्तर भी अच्छा रहेगा। यदि परिवार में माता-पिता तथा अन्य सदस्य बालकों के प्रतिकूल तथा अपने अनुरूप बालकों को पढ़ाना चाहते है तो ऐसी परिस्थिति में बालकों की रुचियाँ प्रभावित होती है तथा उन पर अनायास शैक्षिक बोझ पडता है जिसके परिणामस्वरूप दूरगामी परिणाम निकलते है। जो माता-पिता तथा अन्य वयस्क स्वयं षिक्षा में रुचि लेते हैं तथा अपने बच्चों को भी इसके लिए उत्प्रेरित करते हैं, उस परिवार के किषोरों में शैक्षिक अभिरुचि अधिक पायी जाती है। लेकिन जिस परिवार में माता-पिता तथा अन्य वयस्क सदस्य षिक्षा में रुचि नहीं रखते हैं और न ही अपने बच्चों को इसके लिए प्रेरित करते हैं, इन परिवार के किषोरों में शैक्षिक रुचि का अभाव देखा जाता है व शैक्षिक रूप से पिछड़ जाते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ है व्यक्ति द्वारा अपनी भावानाओं, इच्छाओं, महत्वाकाँक्षाओं और आदर्षों को वास्तविक धरातल तक सीमित रखने और अपने आपको वातावरण के अनुसार ढ़ालने और उसके साथ समायोजन करने अथवा अपने वातावरण को अपने अनुकूल ढ़ालने और उसके साथ समायोजन की योग्यता। जब बालक का घरेलू वातावरण ऐसा होता है जहाॅं उसे विषेष दुलार - प्यार, स्नेह, उसकी अधिकतर आवश्यकताओं की पूर्ति होती है, तो ऐसे बालक का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होता है। यदि घरेलू वातावरण इसके वातावरण के विपरीत होते है, तो बालकों का मानसिक स्वास्थ्य संतोषजनक नहीं होता है और बालक अधिकतर तनावग्रस्त एवं चिन्तित दिखता है।
अध्ययन की आवष्यकता एवं महत्व:-
परिवार का स्वस्थ वातावरण बालक की शैक्षिक रूचि एवं मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए सहायक होता है और परिवार का स्वस्थ वातावरण ही बालक की उच्च एवं निम्न शैक्षिक रूचि एवं मानसिक स्वास्थ्य की ओर अग्रसारित करता है और यही उसके भावी जीवन के विकास में सहायक हैं।
अतः शोधकर्ती को उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों की शैक्षिक रूचि एवं मानसिक स्वास्थ्य पर उनक¢ पारिवारिक वातावरण क¢ प्रभाव देखने की आवश्यकता प्रतीत हुई है। प्रस्तुत शोध अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष से स्पष्ट जानकारी प्राप्त हो सकेगी कि विद्यार्थियों की शैक्षिक रूचि एवं मानसिक स्वास्थ्य पर उनक¢ पारिवारिक वातावरण का क्या प्रभाव पड़ता है, यह जानकारी छात्रों अभिभावकों, शिक्षाविदों, मनोवैज्ञानिकों तथा समाजशास्त्रियों के लिए लाभप्रद सिद्ध होंगे जिससे सहयोगात्मक, सकारात्मक व स्वस्थ शिक्षण के लिए मार्ग प्रषस्त होगा तथा परिवारों में स्वस्थ वातावरण का विकास हो सकेगा।
सम्बन्धित साहित्य का अध्ययनः-
संदर्भित शोध से तात्पर्य अनुसंधान की समस्या से संबंधित उन सभी प्रकार की पुस्तकों, ज्ञानकोषों, पत्र-पत्रिकाओं, प्रकाषित शोध प्रबंधों एवं अभिलेखों आदि से है, जिनके अध्ययन से शोधकर्ता का अपनी समस्या का चयन परिकल्पनाओं के निर्माण, अध्ययन की रूपरेखा तैयार करने एवं कार्य को आगे बढ़ाने में सहायता मिलती है। संबंधित शोध अध्ययन को भौगोलिक दृष्टि से दो भागों में प्रस्तुत किया जा सकता है-
(1) वह अध्ययन जो भारत में किया गया है।
(2) वह अध्ययन जो विदेषों में किया गया है।
भारतीय परिपे्रक्ष्य में शोध अध्ययन:-
ैतपसंोीउपए ैण्(2016) ने ”उच्च माध्यमिक स्तर में अध्ययनरत विद्यार्थियों की शैक्षिक रूचि का अध्ययन“ किया, इस अध्ययन हेतु इन्होने 300 विद्यार्थियों का चयन किया जिनमें 147 छात्र तथा 143 छात्राएं सम्मिलित थी। आँकडो के संग्रह हेतु इन्होने डॉ. एस. पी. कुलश्रेष्ठ द्वारा निर्मित शैक्षिक रूचि प्रपत्र का उपयोग किया गया। अध्ययन के विष्लेषण हेतु सांख्यकीय विधियों में प्रतिशत, मध्यमान, मानक विचलन तथा टी-परीक्षण का उपयोग किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों में छात्र-छात्राओं की शैक्षिक रूचि में सार्थक अन्तर नहीं पाया गयज्ञं
ज्ञंनतए ैण्ए ंदक छपअंेए त्ण् ;2016द्ध ने “कक्षा 10 के विद्यार्थियों के संवेगात्मक बु़िद्ध व उनके व्यक्तित्व के कारकों के मानसिक स्वास्थ्य पर पडने वाले प्रभाव” का अध्ययन किया। इस अध्ययन हेतु इन्होने पंजाब राज्य के छः जिले से प्रतिदर्ष का चयन किया। आँकड़ों को एकत्र करने के हेतु इन्होने राय (1994) द्वारा निर्मित मानसिक स्वास्थ्य मापनी, आइजैंक (1975) द्वारा निर्मित व्यक्तित्व इन्वेंट्री तथा राय (2006) द्वारा निर्मित संवेगात्मक बु़िद्ध परीक्षण का उपयोग किया तथा आँकड़ों के विश्लेषण के लिये प्रोडेक्ट मूमेंट सहसम्बन्ध का प्रयोग किया। अध्ययन के निष्कर्षो में मानसिक स्वास्थ्य का संवेगात्मक बु़िद्ध व व्यक्तित्व के कारकों के मध्य धनात्मक सहसम्बन्ध पाया गया।
छंतंदहए टण्ए ंदक छंतंदहए ैण् (2015) ने “कक्षा 10 में अध्ययनरत विद्यार्थियों की शैक्षिक रूचि का अध्ययन” किया, इस अध्ययन हेतु इन्होने 100 विद्यार्थियों का चयन किया जिनमें 50 छात्र तथा 50 छात्राएं सम्मिलित थी। आँकडो के संग्रह हेतु इन्होने वी. पी. बंसल तथा प्रो. डी. एन. श्रीवास्तव द्वारा निर्मित शैक्षिक रूचि प्रपत्र का उपयोग किया गया। अध्ययन के विश्लेषण हेतु सांख्यकीय विधियों में मध्यमान, मानक विचलन तथा टी-परीक्षण का उपयोग किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों में विभिन्न विषय वर्ग में छात्र-छात्राओं की शैक्षिक रूचि में सार्थक अन्तर नहीं पाया गया।
सुलेखा(2011) ने “उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के पारिवारिक वातावरण एवं मानसिक स्वास्थ्य का उनके अधिगम पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन” किया। इन्होंने माध्यमिक स्कूल के 200 विद्यार्थियों को रूप में सम्मिलित किया और पाया कि विद्यार्थियों के पारिवारिक वातावरण एवं मानसिक स्वास्थ्य का उनके अधिगम पर सार्थक प्रभाव पड़ता है।
राठौर, ए. (2008) ने ”माध्यमिक स्तर शिक्षा के माध्यम का विद्यार्थियों की शैक्षिक रूचि एवं समायोजन पर प्रभाव का अध्ययन“ किया। इस अध्ययन के लिए 100 विद्यार्थियों का चयन किया गया जिसमें 25 छात्र तथा 25 छात्रायें अंग्रेजी माध्यम तथा 25 छात्र तथा 25 छात्रायें हिन्दी माध्यम की थी। इस अध्ययन के लिए डाॅ.एस.पी. कुलश्रेष्ठ (2007) द्वारा निर्मित शैक्षिक रूचि रिकार्ड और ए.के.पी. सिन्हा एवं आर.पी. सिंह द्वारा निर्मित समायोजन अनुसूची उपकरणों का उपयोग किया गया। अध्ययन में पाया कि शिक्षा के माध्यम का विद्यार्थियों शैक्षिक रूचि एवं समायोजन पर सार्थक प्रभाव पड़ता है।
ैींदांतए ैण् च्ण्ए ंदक श्रमइंतंरए त्ण्(2006) ने ”अनाथ किषोरावस्था के मानसिक स्वास्थ्य का अध्ययन“ किया। इनके अध्ययन का एक उद्देश्य अनाथ किषोरावस्था के बालकों के मानसिक स्वास्थ्य का उनकी शैक्षिक उपलब्धि का अध्ययन करना भी था। इन्होंने न्यादर्ष में 9 से 15 वर्ष के उम्र के 52 लड़के व 28 लड़कियों को लिया। इनके अध्ययन में पाया गया कि अनाथ किषोरावस्था के बालकों का मानसिक स्वास्थ्य उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर ऋणात्मक प्रभाव डालता था।
ैववकए छण् ;1997द्ध ने “बच्चों में पारिवारिक समस्याओं का उनके गृह वातावरण के सन्दर्भ में अध्ययन” किया। इस अध्ययन में इन्होंने गृह वातावरण का गुणात्मक अध्ययन किया। अपने इस अध्ययन में इन्होंने 74 बच्चों को न्यादर्ष के रूप में सम्मिलित किया जिसमें 40 लड़के और 34 लड़कियां थी। आँकडें एकत्र करने हेतु इन्होंने 20 एकाषों की स्वनिर्मित गृह वातावरण मापनी का प्रयोग किया। निष्कर्ष में पाया गया कि बालक तथा बालिकाओं के गृह वातावरण में सार्थक अंतर नही है तथा उम्र तथा लिंग के आधार पर बालक व बालिकाओं में उनके गृह वातावरण के सन्दर्भ में उनकी पारिवारिक समस्याओं में अंतर पाया गया।
च्तंेंकए डण् ;1994द्ध ने “उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों का सामाजिक अलगाव तथा उनके पारिवारिक वातावरण का अध्ययन” किया। इस अध्ययन के लिये इन्होने 491 न्यादर्ष को चुना जिनमें 253 छात्रायें व 238 छात्र थे। इनके द्वारा उपकरण का निर्माण किया गया। प्राप्त आंकडों के विश्लेषण हेतु सहसम्बन्ध विधि को प्रयोग किया गया। निष्कर्षो में विद्यार्थियों के सामाजिक अलगाव तथा उनके पारिवारिक पर्यावरण के उच्च नकारात्मक संबध पाया गया।
विदेशी पृष्ठ भूमि के शोध अध्ययन:-
श्रवेमचीए ब्ण् डण् न्ण् ;2015द्ध ने “हाईस्कूल के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य का अध्ययन” किया। इस अध्ययन हेतु इन्होने 150 विद्यार्थियों को प्रतिदर्ष के रूप में सम्मिलित किया गया। आँकड़ों को एकत्र करने हेतु इन्होने ड्रोेविड एवं अगस्टीन (1990) द्वारा निर्मित मानसिक स्वास्थ्य इन्वेंट्री का उपयोग किया तथा आँकड़ों के विश्लेषण के लिये मध्यमान, मानक विचलन, टी-परीक्षण इत्यादि सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग किया। अध्ययन के निष्कर्षो में छात्राओं का मानसिक स्वास्थ्य छात्रों से अधिक अच्छा पाया गया तथा ग्रामीण विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य शहरी विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की अपेक्षा अधिक अच्छा पाया गया परन्तु एकाकी परिवार तथा संयुक्त परिवार के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य में कोई अन्तर नहीं पाया गया।
ैंबोए टण् मज ंसण् ;2014द्ध एवं अन्य ने “पारिवारिक वातावरण और किषोरों की भलाई का अध्ययन” किया और इन्होंने अपने अध्ययन से 12 से 17 वर्ष तक बच्चों को सम्मिलित किया, इन्होंने अपने अध्ययन के निष्कर्ष के रूप में पाया कि 65ः किषोर अपने माता - पिता से बहुत अच्छी तरह से संवाद कर सकते है, 50ः से कम किशोर अपने परिवार के साथ एक साथ रात का भोजन करते है, 10ः कक्षा 10 के छात्रोें के माता - पिता को पता नही है कि वे विद्यालय के बाद क्या कर रहे है, संयुक्त अभिभावक में 50ः व एकाकी अभिभावक 40ः सप्ताह में एक बार ही सख्ती से व्यायाम करते है और ज्यादातर किषोर अपने परिवार के साथ मिलकर काफी अच्छी तरह से रह रहे है।
।समगंदकमतए ैण् ब्ण् च्ण् ;2011द्ध ने ”किषोरों के पारिवारिक वातावरण तथा आंतरिक तथा बाहरी व्यवहारों का अध्ययन“ किया, न्यादर्ष के रूप में इन्होेंने 12-19 वर्ष तक किशोरों को सम्मिलित किया, आँकडों को एकत्र करने के हेतु इन्होंने मूस एवं मूस (1994) द्वारा निर्मित पारिवारिक वातावरण मापनी का प्रयोग किया, तथा प्राप्त आँकडों के विष्लेषण हेतु इन्होंने ैच्ैै साॅफ्टवेयर प्रोग्राम का उपयोग किया। इनके अध्ययन के निष्कर्षो में पाया गया कि मापनी के सभी उपआयामों (संषक्ति, अभिव्यंजकता व द्वन्द्व, स्वतंत्रता, सक्रिय, अभिविन्यास, बौद्धिक, सांस्कृतिक अभिविन्यास सक्रिय मनोरंजन अभिविन्यास, नैतिक धार्मिक अभिविन्यास, नियंत्रण व संगठन) किषोरांे के बाहरी व्यवहार को प्रभावित करते है तथा मापनी के उपआयामों में से 3 आयाम संषक्ति, अभिव्यंजकता व द्वन्द्व किषोरों के बाहरी व्यवहार के साथ-साथ आंतरिक व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
भ्ंसंूंीए प्ण् ;2006द्धण्ने “विद्यााथर््िायों की अभिप्रेरणा, पारिवारिक वातावरण, विद्यार्थी के चारित्रिक गुण का उनकी विद्यालयी उपलब्धि पर पडने वाले प्रभाव का अध्ययन” किया। अपने अध्ययन में निम्न निष्कर्ष प्राप्त किया- लिंग के आधार पर छात्र-छात्राओं की उपलब्धि में अन्तर नहीं था। विद्यार्थी के अभिप्रेरणा का माध्य स्तर अभिभावकीय प्रभाव के माध्य स्तर तथा उनके चरित्रिक गुणों से कम था। अभिप्रेरणा, पारिवारिक वातावरण, विद्यार्थी के चारित्रिक गुण तथा विद्यालयी उपलब्धि मंे निम्न किन्तु महत्वहीन या सार्थकहीन सहसम्बन्ध था। अभिप्रेरणा और विद्यार्थी के गुण में विषेष रूप (तौर) से उच्च सहसम्बन्ध पाया गया।
स्मअपदेवद मज ंसण् ;2006द्ध ने “जूनियर तथा सीनियर हाईस्कूल के विद्यार्थियों की शैक्षिक रूचि जानने हेतु एक शोध अध्ययन” किया। इस अध्ययन हेतु इन्होंने 85 विद्यार्थियों को न्यादर्ष के रूप में सम्मिलित किया, अपने अध्ययन के निष्कर्षो में इन्होंने पाया के विद्यार्थी की रूचि कलात्मक, सामाजिक एवं उद्यमी क्षेत्र में अधिक है।
ैवूीदमलए ैण् ;2005द्ध ने “पारिवारिक पर्यावरण के सन्दर्भ में किशोरों की शैक्षिक महत्वाकांक्षाओं का अध्ययन” किया। इस अध्ययन के लिये इन्होने कक्षा 9 के 17 विभिन्न विद्यालयों के 1000 छात्रों कोे न्यादर्ष के रूप में सम्मिलित किया। इस अध्ययन के लिए उपकरण के रूप में शर्मा और गुप्ता द्वारा निर्मित शैक्षिक आकांक्षा मापनी, भाटिया और चड्ढा द्वारा निर्मित पारिवारिक पर्यावरण मापनी का प्रयोग किया गया। परिणामों में पाया गया कि पिता के व्यवसायों में विभिन्नता होने पर भी किशोरों के शैक्षिक महत्वकांक्षाओं में कोई अंतर नहीं था और इन्होने बताया कि जिन छात्रों के परिवार पारिवारिक द्वन्द से स्वतंत्र होते है, परिवार में उनकी परवाह की और उनकी बात सुनी जाती है, उन्हे चुनने की स्वतंत्रता होती थी, उन छात्रों में शैक्षिक महत्वाकांक्षायें पायी जाती है।
च्मजमतेमदए ।ण् ब्ण्ए ंदक ज्ञमससंउए ैण् ळण् ;छक्द्ध ने “बालकों की उपलब्धि इतिहास मानसिक स्वास्थ्य तथा पारिवारिक वातावरण का अध्ययन” किया, अपने इस अध्ययन हेतु इन्होंने कक्षा 7-8 के 570 विद्यार्थियों का चयन किया। आँकड़ों को एकत्र करने के लिये इन्होंने तीनों चरों के लिये अलग-अलग मानकीकृत परीक्षण का उपयोग किया। इनके अध्ययन के निष्कर्षों में पाया गया कि बालक की उपलब्धि इतिहास, मानसिक स्वास्थ्य तथा पारिवारिक पर्यावरण के द्वारा बालक की उपलब्धि और उसकी व्याख्या की जा सकती है।
च्महंदए थ्ण् ;छक्द्ध ने ”पारिवारिक वातावरण और किषोरों के सकारात्मक मानसिक अवस्थाओं अर्थात खुषी, सुख, आषावाद तथा आशाओं का उनके सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में अध्ययन” किया इस अध्ययन हेतु इन्होंने 400 विद्यार्थियों (200 छात्र व 200 छात्राओं) को अपने शोध के न्यादर्ष चुना जो भारतीय तथा ईरानी थे। उपकरण में इन्होंने मूस और मूस (1994) द्वारा निर्मित पारिवारिक वातावरण मापनी, हिल तथा आरगाईल (2002) द्वारा निर्मित सुखी प्रष्नावली का प्रयोग किया। अध्ययन के निष्कर्ष मंे किषोरों की खुषी के साथ पारिवारिक वातावरण का सार्थक सहसम्बन्ध पाया गया।
अध्ययन के उद्देष्य:-
प्रस्तुत शोध अध्ययन के अध्ययन के उद्देश्य निम्नलिखित है -
1. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर प्रभाव का अध्ययन करना।
2. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर प्रभाव का अध्ययन करना।
3. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन करना।
4. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन करना।
अध्ययन की परिकल्पनाएँः-
प्रस्तुत शोध अध्ययन के अध्ययन के उद्देष्य की पूर्ति हेतु निर्मित परिकल्पनाएँ निम्नलिखित है -
1. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर कोई प्रभाव नही पाया जाएगा।
2. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर कोई प्रभाव नही पाया जाएगा।
3. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नही पाया जाएगा।
4. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नही पाया जाएगा।
अध्ययन का परिसीमन:-
प्रस्तुत शोध में शोधकर्ती ने परिसीमा का निर्धारण इस प्रकार किया है:-
(1) प्रस्तुत शोध के लिए रायपुर जिले का चयन किया गया है।
(2) प्रस्तुत शोध के लिए रायपुर जिले के अंतर्गत 20 विद्यालयों का चयन किया गया है।
(3) प्रत्येक विद्यालय से 20 छात्र एवं 20 छात्राएं कुल 800 विद्यार्थियों का चयन किया जायेगा।
शोध विधि:-
इस शोध प्रबंध में ”पारिवारिक वातावरण क¢ संदर्भ में उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की शैक्षिक रूचि एवं मानसिक स्वास्थ्य का अध्ययन” किया जायेगा। अतः आंकड़ों का संकलन प्रस्तुत शोध अध्ययन की प्रकृति को ध्यान में रखकर शोधकर्ती द्वारा वर्णनात्मक अनुसंधान की सर्वेक्षण विधि को अपनाया गया है क्यांेकि शोध अध्ययन में आँकडो का संग्रह सर्वेक्षण विधि द्वारा सहजतापूर्वक किया जा सकता है। प्रस्तुत शोध में शोधकर्ती द्वारा सर्वेक्षण विधि द्वारा जनसंख्या से न्यादर्ष लेकर शोध की समस्त प्रक्रिया में प्रतिस्थापित किया है।
प्रतिदर्ष चयन विधि:-
न्यादर्ष विधि के द्वारा एक विस्तृत समूह में से कुछ प्रतिनिधि पूर्ण इकाईयों का चुनाव किया जाता है। इसका चयन जनसंख्या से किया जाता है। ताकि शोध द्वारा प्राप्त निष्कर्षों में अधिक प्रमाणिकता एवं वैधता प्राप्त की जा सकें।
प्रस्तुत शोध प्रबंध में शोधकर्ती द्वारा रायपुर जिले का चुनाव किया गया है। प्रस्तुत शोध अध्ययन हेतु 800 उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थी न्यादर्ष का चयन किया गया है। जिसमें 400 छात्र व 400 छात्राओं का चयन किया गया है।
सारणी क्रमांक - 1.1 जनसंख्या के अतंर्गत चयनित उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं अध्ययनरत् छात्र - छात्राओं की संख्या
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1- उपकरण का चयनः-
2- प्रस्तुत अध्ययन में निम्नलिखित उपकरणों को प्रयुक्त किया गया है -
3- 1. पारिवारिक वातावरण ज्ञात करने हेतु हरप्रीत भाटीया और एन. के. चड्डा द्वारा निर्मित पारिवारिक वातावरण मापनी।
4- 2. शैक्षिक रूचि ज्ञात करने हेतु एस.पी. कुलश्रेष्ठ द्वारा निर्मित शैक्षिक रूचि प्रपत्र।
5- 3. मानसिक स्वास्थ्य ज्ञात करने हेतु सुषमा तलेसरा और अख्तर बानो द्वारा निर्मित मानसिक स्वास्थ्य मापनी।
6-
7- शोध अध्ययन में प्रर्युक्त सांख्यिकीय विधियाँः-
8- सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग किया जाता है उसके पष्चात् सामग्री की विश्लेषण की व्याख्या की जाती है। उपकरण से प्राप्त प्राप्तांकों अथवा आँकड़ों को विभिन्न तालिकाओं में व्यवस्थित कर उनका विश्लेषण प्रतिषत ;ःद्धए मध्यमान ;डद्धए मानक विचलन ;ैक्द्धए क्रान्तिक अनुपात ;ब्त्द्धए प्रोडेक्ट मूमेण्ट सहसम्बन्ध ;तद्धए थ् त्ंजपव की गणना कर किया गया तथा दण्डआरेख द्वारा प्रदर्षित कर व्याख्या की गयी। उपकरण से प्राप्त आँकड़ों को विभिन्न तालिकाओं में व्यवस्थित तथा उनका विश्लेषण डै वििपबम मगबमस तथा ैच्ैै की मदद से किया गया है।
9-
10-परिकल्पना का प्रमाणीकरण एवं परिणाम:-
11-शोधकर्ती के द्वारा प्रस्तावित परिकल्पनाओं के सत्यापन हेतु परीक्षण का प्रषासन एवं मापन किया गया तथा सांख्यिकीय द्वारा निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया गया है।
12-
13-1. परिकल्पना भ्व1 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर कोई प्रभाव नही पाया जाएगा।
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प्रदत्तों का विश्लेषण:-
उपरोक्त तालिका संख्या - 1.2 में उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर प्राप्त मध्यमान 45.504 तथा प्राप्त ष्थ्ष् का मान 1959.890 है यह प्राप्त मान ण्05 सार्थकता स्तर पर सार्थक नहीं है।
परिणाम की व्याख्या:-
उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर प्रभाव पाया जाएगा क्योंकि परिणाम से प्राप्त ष्थ्ष् का मान इंगित करता है सारणी मूल्य से गणना मूल्य अधिक पाया गया अतः परिकल्पना क्रमांक भ्व1 स्वीकृत नहीं होती।
14. परिकल्पना भ्व2 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर कोई प्रभाव नही पाया जाएगा।
प्रदत्तों का विश्लेषण:-
उपरोक्त तालिका संख्या - 1.3 में उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर प्राप्त मध्यमान 42.76 तथा प्राप्त ष्थ्ष् का मान 1518.675 है यह प्राप्त मान ण्05 सार्थकता स्तर पर सार्थक नहीं है।
परिणाम की व्याख्या:-
उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर प्रभाव पाया जाएगा क्योंकि परिणाम से प्राप्त थ्ष् का मान इंगित करता है सारणी मूल्य से गणना मूल्य अधिक पाया गया अतः परिकल्पना क्रमांक भ्व2 स्वीकृत नहीं होती।
15. परिकल्पना भ्व3 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नही पाया जाएगा।
तालिका संख्या - 1.3 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्राप्त थ्ष् मान
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ikfjokfjd okrkoj.k |
N |
Ekkufld LokLF; e/;eku |
SS |
df |
MS |
F’ eku |
|
|
vkSlr ls mPp vkSlr vkSlr ls fuEu |
400 |
1316-102 |
156644-440 |
399 |
1316-102 |
7502-450 -05 lkFkZdrk Lrj ij lkFkZd ugha |
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rkfydk la[;k & 1-4 mPprj ek/;fed fo|ky;ksa ds Nk=ksa ds ikfjokfjd okrkoj.k dk muds ekufld LokLF; ij izkIr ‘F’ eku
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N |
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SS |
df |
MS |
F’ eku |
|
|
vkSlr ls mPp vkSlr vkSlr ls fuEu |
400 |
1351-662 |
160869-178 |
399 |
1351-662 |
10210-714 -05 lkFkZdrk Lrj ij lkFkZd ugha |
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प्रदत्तों का विश्लेषण:-
उपरोक्त तालिका संख्या - 1.3 में उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्राप्त मध्यमान 1316.102 तथा प्राप्त थ्ष् का मान 7502.450 है यह प्राप्त मान ण्05 सार्थकता स्तर पर सार्थक नहीं है।
परिणाम की व्याख्या:-
उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पाया जाएगा क्योंकि परिणाम से प्राप्त थ्ष् का मान इंगित करता है सारणी मूल्य से गणना मूल्य अधिक पाया गया अतः परिकल्पना क्रमांक भ्व3 स्वीकृत नहीं होती।
14. परिकल्पना भ्व4 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नही पाया जाएगा।
प्रदत्तों का विश्लेषण:-
उपरोक्त तालिका संख्या - 1.4 में उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्राप्त मध्यमान 1351.662 तथा प्राप्त ष्थ्ष् का मान 10210.714 है यह प्राप्त मान ण्05 सार्थकता स्तर पर सार्थक नहीं है।
परिणाम की व्याख्या:-
उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पाया जाएगा क्योंकि परिणाम से प्राप्त थ्ष् का मान इंगित करता है सारणी मूल्य से गणना मूल्य अधिक पाया गया अतः परिकल्पना क्रमांक भ्व9 स्वीकृत नहीं होती।
निष्कर्षः-
1. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर प्रभाव पाया गया है। ? ?
2. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनकी शैक्षिक रूचि पर प्रभाव पाया गया है।
3. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पाया गया है।
4. उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्राओं के पारिवारिक वातावरण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पाया गया है।
संदर्भ ग्रंथ सूचीः-
1 अस्थाना, एम., एवं वर्मा, के. बी. (2008). व्यक्तित्व मनोविज्ञान. दिल्ली: मोतीलाल बनारसीदास।
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3 गुप्ता, एस. पी. (2007). उच्चतर शिक्षा मनोविज्ञान. इलाहाबाद रू शारदा पुस्तक भवन।
4 राय, पी. (2010-11). अनुसंधान परिचय. आगरारू लक्ष्मी नारायण अग्रवाल पुस्तक प्रकाशन।
5 वोहरा, ए. आर. (2006). मानसिक स्वास्थ्य और मनः चिकित्सा. दिल्ली: आर्य प्रकाशन मंडल।
6 पाठक, पी. डी. (2011). शिक्षा मनोविज्ञान. आगरारू अग्रवाल पब्लिकेशन.
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8ैीवकीहंदहंण्पदसिपइदमजण्ंबण्पदध्
9 ीजजचरूध्ध्मदण्ूपापचमकपंण्वतहध्ूपापध्ैवबपंसऋबवउचमजमदबम त्मजतपमअम
10णीजजचरूध्ध् ंकअंदण्चीलेपवसवहलण्वतहध् बवदजमदजध्इलध्लमंत त्मजतपमअम
Received on 19.10.2020 Modified on 20.11.2020
Accepted on 13.12.2020 © A&V Publication all right reserved
Int. J. Ad. Social Sciences. 2020; 8(4):173-180.